एल्फिस्टन गणेश उत्सव आयोजन समिति के संकेत ने बताया कि मूर्ति को तैयार करने में 200 से 250 किलो पेपर का इस्तेमाल हो रहा है. इसे तैयार करने में तीन महीने का समय लग रहा है.



 महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस बार गणेश चतुर्थी 19 सितंबर को है. इस दिन से 10 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव शुरू हो जाएगा. वहीं 28 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश उत्सव का समापन होगा. मूर्तियों के बनाने का काम शुरू हो चुका है. मूर्तिकार भगवान गणेश की मूर्ति बनाने में जुटे हुए हैं. महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की धूम होती है. मूर्तिकार अलग-अलग तरह की मूर्तियां बना रहे हैं जो गणेश उत्सव में आर्कषण का केंद्र बनते हैं. 

राजधानी मुंबई में ईको-फ्रेंडली मूर्तियां बनाई जा रही हैं, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान हो. मूर्तिकार ऐसी मूर्तियां बना रहे हैं जो कुछ ही घंटों में पानी में घुल जाएंगी. न्यूज एजेंसी एएनआई को एल्फिस्टन गणेश उत्सव आयोजन समिति के संकेत ने जानकारी दी कि इन मूर्तियों को तैयार करने में 200 से 250 किलो कागज का इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया, "करीब 34 सालों से हम गणेश उत्सव मना रहे हैं. बीते दो सालों से हम पेपर से बनी 18 से 19 फीट की भगवान गणेश की मूर्ति बना रहे हैं. इस बार का थीम भगवान कृष्ण का कालिया मर्दन है. मूर्ति भी उसी रूप से बनी है. डोकोरेशन भी उसी रूप में किया जा रहा है."

संकेत ने आगे बताया कि मूर्ति बनाने में 200 से 250 किलो पेपर का इस्तेमाल होता है. वहीं मूर्तियों को पूरी तरह से तैयार करने में कम से कम तीन महीने का टाइम लगता है. पिछले तीन चार सालों से पीओपी का मंदी चल रहा है. पीओपी से बनी मूर्तियों को लेकर रिस्ट्रिक्शन भी आ रहे हैं. ऐसे में मंडल ने फैसला लिया कि अगर हमें पीओपी को लेकर परेशानी आ रही है तो अलग तरीका निकालना चाहिए. अलग मेटेरियल यूज करेंगे और मूर्तियों की ऊंचाई को कम किए बिना उसे बना पाए. इस वजह से हम लोगों ने रिसर्च किया और हमें पता चला कि पेपर की मूर्ति बन सकती है. हमारे मूर्तिकार ने सलाह दी और 18 फीट की भगवान गणेश की मूर्ति तैयार की जा रही है. 

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