नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को दावा किया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू एवं कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द कर ऐतिहासिक गलती की है और ऐसा करके उन्होंने कश्मीर की ‘आजादी’ का रास्ता खोल दिया है। तमाम प्रयासों के बावजूद कश्मीर मुद्दे पर दुनियाभर के दरवाजे बंद होने के बाद खान ने कश्मीर मुद्दे पर देश को संबोधित करते हुए राजनयिक मोर्चे पर जीत का दावा किया।

खान ने कहा, “हमने कूटनीतिक मोर्चे पर जीत हासिल की है। हमने कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण किया। दूतावासों और राष्ट्र प्रमुखों से बात की गई। कश्मीर मुद्दे पर 1965 के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक सत्र बुलाया। हमने इसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने भी रखा और उन्होंने इस मुद्दे को उठाया।”

खान ने कहा कि यह उनकी सरकार की नीति थी कि वह भारत और अफगानिस्तान सहित अन्य देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध रखे। उन्होंने कहा, “लेकिन, भारत हमेशा आतंकवाद के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाने के अवसरों की तलाश में रहता है।”

उन्होंने कहा, “मैंने भारत से कहा कि अगर वे एक कदम बढ़ाते हैं तो हम दो कदम आगे बढ़ेंगे। हमारा मुख्य मुद्दा कश्मीर है। लेकिन, हर बार जब हम भारत के साथ बातचीत की बात करते हैं तो वे इस मुद्दे से अलग हो जाते हैं और पाकिस्तान के खिलाफ आरोप लगाने लगते हैं।”

क्रिकेटर से राजनेता बने खान ने चेतावनी दी कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ तो इसका प्रभाव विश्व स्तर पर महसूस किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “परमाणु युद्ध में कोई भी नहीं जीतता। यह न केवल इस क्षेत्र में कहर बरपाएगा, बल्कि पूरे विश्व को इसका परिणाम भुगतना होगा। अब इसे देखना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का काम है।”

खान ने कहा कि वह 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कश्मीर मुद्दे को उठाएंगे और न्यूयॉर्क में विश्व के नेताओं से मुलाकात करेंगे।

उन्होंने कहा, “यह संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी है। उन्होंने कश्मीर के लोगों से वादा किया था कि वे उनकी रक्षा करेंगे। इतिहास में यही हुआ है कि विश्व के तमाम निकाय हमेशा शक्तिशाली के साथ खड़े रहे हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र को पता होना चाहिए कि 1.25 अरब मुस्लिम इसकी ओर देख रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए पाकिस्तान में हर हफ्ते 30 मिनट का एक आयोजन किया जाएगा और इस तरह का पहला समारोह शुक्रवार को होगा।

खान ने कहा, “मेरा मानना है कि पूरे देश को कश्मीरी आवाम के साथ खड़ा होना चाहिए। मैंने यह कहा है कि मैं कश्मीर के राजदूत के रूप में काम करूंगा। मैं इस मुद्दे को राष्ट्र प्रमुखों व अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के सामने उठाऊंगा। मैं उन्हें बताऊंगा कि यह (मोदी) सरकार सामान्य नहीं है, बल्कि एक खतरनाक विचारधारा का अनुसरण करती है।”

इस्लामाबाद के लिए सबसे बड़ा झटका खाड़ी देशों और इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी का रवैया रहा है, जिन्होंने इस मामले में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

खान ने कहा, “मैंने अखबारों में पढ़ा कि लोग निराश हैं कि मुस्लिम देश कश्मीर के साथ नहीं जा रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि आप निराश न हों। अगर कुछ देश अपने आर्थिक हितों के कारण इस मुद्दे को नहीं उठा रहे हैं, तो वे समय के साथ अंतत: इस मुद्दे को उठाएंगे।”

उनका यह भाषण तब आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में जी-7 सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है। ट्रंप ने कहा कि भारतीय नेता ने उन्हें बताया है कि कश्मीर की स्थिति नियंत्रण में है और दोनों पड़ोसी देश मुद्दों को अपने स्तर पर सुलझा सकते हैं।


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