नई दिल्ली I पिछले चार सालों में भारतीयों का पैसा 50 फीसदी बढ़ जाने पर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. स्विस बैंक की ओर से जारी आंकड़ों को लेकर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. जेटली का कहना है कि स्विस बैंकों में जमा पूरा पैसा काला धन नहीं है. वहां जिन भारतीयों का पैसा जमा है, उनमें से ज्यादातर भारतीय मूल के वे लोग हैं, जो विदेश में बस चुके हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरे मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों द्वारा जमा कराए गए पैसे में 50 फीसदी की बढ़ोतरी को लेकर पीएम मोदी पर तंज कसा है.

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पर एक ब्लॉग लिखकर उन खबरों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा है कि कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार की नोटबंदी का कदम फेल हो गया है.


जेटली ने फेसबुक पर लिखा, '' स्व‍िट्जरलैंड स्व‍िस बैंकों में रखे पैसे की डिटेल साझा करने के लिए पहले तैयार नहीं था. लेकिन, बाद में वैश्विक दबाव की वजह से वह इसके लिए तैयार हुआ है. अब उसने उससे जानकारी मांगने वाले देशों को डिटेल देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है.'' जेटली ने यह भी बताया कि जनवरी, 2019 से भारत को भी इसकी जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड हमेशा से जानकारियों को साझा करने में अनिच्छुक रहा है. आल्पाइन देशों ने अपने घरेलू कानूनों को संशोधित किया है, जिनमें सूचना सार्वजनिक करने के नियम भी शामिल हैं. इन देशों ने भारत के साथ वास्तविक समय में जानकारियां साझा करने के समझौते पर साइन किए हैं. इससे भारत को उसी समय जानकारी मिल जाएगी जब कोई भारतीय वहां पैसा जमा करेगा.

जेटली ने कहा कि जनवरी 2019 से यह जानकारी आने लगेगी. अवैध रुप से धन जमा करने वाले किसी भी जमाकर्ता को यह पहले से पता होगा कि कुछ महीनों में उनका नाम सार्वजनिक होना ही है और उन पर भारत में कालाधन रोधी कानूनों के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी है. उन्होंने कहा कि जो लोग इस मामले पर सार्वजनिक बहस कर रहे हैं उन्हें इन आधारभूत तथ्यों को समझना चाहिए, बजाय कोई कम या गलत जानकारी वाला दृष्टिकोण रखें.


राहुल गांधी ने कसे तंज
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों द्वारा जमा कराए गए पैसे में 50 फीसदी की बढ़ोतरी को लेकर पीएम मोदी पर तंज कसा है. स्विस बैंकों में चार साल के दौरान भारतीयों के पैसों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी पर राहुल ने कहा- 'भारतीय नागरिकों द्वारा जमाए कराए जाने वाले धन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह ‘सफेद’ धन है.'

राहुल गांधी ने इसे लेकर एक ट्वीट भी किया. उन्होंने कहा कि 2014 में पीएम मोदी ने कहा था कि मैं स्विस बैंकों में जमा ‘काला’ धन लाऊंगा और हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपये डालूंगा. 2016 में उन्होंने कहा कि नोटबंदी से भारत कालेधन से मुक्त हो जाएगा. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 2018 में वह (प्रधानमंत्री) कहते हैं कि स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों द्वारा जमाए कराए जाने वाले धन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह ‘सफेद’ धन है.

उधर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अगले साल तक काला धन का सारा डेटा भारत में वापस आ जाएगा. गोयल का यह बयान SNB के उस डेटा के तुरंत बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि साल 2017 तक भारत के हिस्से का काला धन 50 फीसदी और बढ़कर 7,000 करोड़ हो गया.


दरअसल, स्विस बैंकों के साथ भारतीय धन में बढ़ोत्तरी आश्चर्यजनक है क्योंकि विदेशों में रखे काले धन पर भारत लगातार कठोर नीति अपना रहा है. 2016 में स्विस बैंकों में भारतीय धन में 45 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जो अपने सबसे बड़े सालाना गिरावट के साथ 676 मिलियन (लगभग 4,500 करोड़ रुपये) तक पहुंच गई थी. स्विस बैंक ने डेटा साल 1987 से सार्वजनिक शुरू करना किया, उसके बाद यह सबसे बड़ी गिरावट थी.
एसएनबी आंकड़ों के मुताबिक, स्विस बैंकों के साथ सीधे भारतीयों द्वारा आयोजित कुल फंड 2017 में 99 9 मिलियन स्विस फ्रैंक (6,8 9 1 करोड़ रुपये) तक पहुंच गए, जबकि फिडूशीएरी या संपत्ति प्रबंधकों के माध्यम से 16.2 मिलियन (112 करोड़ रुपये) हो गए. साल 2016 के अंत में ये आंकड़े क्रमश: 664.8 मिलियन और 11 मिलियन थे. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 के अंत में स्विस बैंकों में भारतीय धन में ग्राहक जमा के रूप में 464 मिलियन (3,200 करोड़ रुपये), अन्य बैंकों के माध्यम से 152 मिलियन (1,050 करोड़ रुपये) और 383 मिलियन (2,640 करोड़ रुपये) अन्य देनदारियों के रूप में शामिल थे.
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